कांग्रेसछत्तीसगढ़दुर्गदुर्ग-भिलाई विशेषबीजेपी
भिलाई के तालपुरी में विरोध: सीवरेज प्लांट की दुर्गंध से फूटा जनता का गुस्सा, चुनाव बहिष्कार का किया ऐलान!
8-10 साल से नरकीय जीवन जी रहे रहवासी, बोले— 'समाधान नहीं तो वोट नहीं'; प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल।

दुर्ग
छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भिलाई के तालपुरी ट्विनसिटी के ए और बी ब्लॉक के हजारों निवासियों ने सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले 8 से 10 सालों से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से आने वाली भयंकर दुर्गंध से परेशान लोगों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। रहवासियों ने साफ-साफ लफ्जों में ऐलान कर दिया है कि अगर उन्हें इस बदबू से निजात नहीं मिली, तो वे आने वाले नगर निगम चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। यानी साफ़ संदेश है— ‘नो सॉल्यूशन, नो वोट’।
तालपुरी के निवासियों का कहना है कि वे बीते एक दशक से अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि लोग सुबह-शाम अपने घरों की खिड़कियां और दरवाजे तक नहीं खोल सकते। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों का सांस लेना दूभर हो गया है। बदबू के कारण ताजी हवा तो दूर, घरों की बाल्कनियों में कपड़े सुखाना भी आफत बन चुका है। निवासियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन, नगर निगम के अधिकारियों, मंत्रियों और यहां तक कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और केंद्र सरकार के CPGRAMS पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 4 साल पहले नगर निगम ने एक योजना बनाई थी। इसके तहत इस बदबूदार STP प्लांट को हटाकर एक पाइपलाइन के जरिए भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाना था। इस पूरी योजना की लागत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन फाइलों में दबी यह योजना कभी धरातल पर नहीं उतर सकी। प्रशासन हर बार बजट की कमी, फाइलों की मंजूरी और अनुमति का बहाना बनाकर मामले को टालता रहा।
अब गुस्साए रहवासियों ने ‘हस्ताक्षर अभियान’ शुरू कर दिया है। एसटीपी हटाने की मांग को लेकर रेजीडेंट्स एसोसिएशन ऑफ गुलमोहर अपार्टमेंट्स की तरफ से चलाए जा रहे इस अभियान में सैकड़ों लोगों ने दस्तखत कर अपना विरोध दर्ज कराया है। निवासियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि सरकार और नगर निगम इस योजना की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक करे और काम शुरू होने की समय सीमा बताए। अगर जल्द ही इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो चुनाव के दिन पोलिंग बूथ खाली नजर आएंगे।



