
दुर्ग/नई दिल्ली – आंखों में बेहतर भविष्य के सपने और दिल में उच्च शिक्षा की उम्मीदें संजोए दुर्ग से दिल्ली गया 20 वर्षीय छात्र युवराज सोनी अब कभी नहीं लौटेगा। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक इमारत हादसे ने न केवल एक नौजवान की जान ले ली, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां मलबे के ढेर में दफन कर दीं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बी.कॉम की पढ़ाई कर रहा युवराज, दुर्ग के पंचशील नगर का निवासी था। अभी कुछ ही दिन पहले रक्षाबंधन के पावन पर्व पर वह अपने घर आया था। बहनों से कलाई पर रक्षा का धागा बंधवाकर, परिवार के साथ त्यौहार की खुशियां मनाकर वह महज तीन दिन पहले ही दिल्ली लौटा था। परिजनों को क्या पता था कि जिस बेटे को वे उज्ज्वल भविष्य के लिए स्टेशन पर मुस्कुराते हुए विदा कर रहे हैं, वह उनकी आखिरी मुलाकात साबित होगी।
सिस्टम की घोर लापरवाही ने ली जान
सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले छात्र बहुल इलाके में जर्जर या अवैध निर्माण कार्य पर समय रहते कार्रवाई न होना सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती और गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस अनदेखी का परिणाम है जहां नियमों को ताक पर रखकर इमारतें खड़ी या मरम्मत की जाती हैं और खामियाजा बाहर रहकर पढ़ने वाले मासूम छात्रों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।
घर में पसरा मातम, परिजन दिल्ली रवाना
देर रात जैसे ही दिल्ली से युवराज की असामयिक मौत की खबर दुर्ग पहुंची, पंचशील नगर स्थित उसके घर में कोहराम मच गया। मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। युवराज का पार्थिव शरीर दिल्ली के एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में रखा गया है। सूचना मिलते ही बदहवास परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं।
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर महानगरों में छात्रों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के ऑडिट और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



