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Chhattisgarh के कोरबा जिले में गहराया जल संकट का खतरा, किसानों की चिंता बढ़ी,प्रचंड गर्मी के बीच अघोषित बिजली काटने से लोग परेशान!

कोरबा – छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नगर पंचायत पाली तथा आसपास ग्रामों में जलस्त्रोत और जल स्तर में दिन प्रतिदिन गिरावट होनें से जल संकट गहराते जा रहा है. उधर कृषि कार्य को लेकर बादलों की बेरुखी से किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है. अब किसानों समेत आम लोगों को भी अपनी समस्याओं के हल और गर्मी से राहत पाने के लिए बारिश का बेसब्री से इंतजार है।

पूरा प्रदेश आषाढ़ माह में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहा है. इस मौसम में प्री मानसूनी बारिश शुरू होने से गर्मी और जल संकट से राहत महसूस करते हैं. लेकिन इसके उलट मौसम ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है. जहां किसानों का कृषि कार्य पिछड़ सकता है. वहीं जलस्तर व जल स्रोतों में कमी से जल संकट गहराते जा रहा है. वही गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है. बिजली की अघोषित कटौती लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाली है.

वार्डों में की जा रही टैंकरों से जल आपूर्ति

पाली के निकट सरायपाली ओपन कास्ट कोल परियोजना आरंभ होने के बाद क्षेत्र में जलस्तर में कहीं कम तो कहीं ज्यादा गिरावट देखने को मिला है. जल संकट से निपटने नगर पंचायत के द्वारा वार्डो मे पानी टैंकर से जलापूर्ति कर राहत देने का प्रयास किया जा रहा है तो एसईसीएल द्वारा भी बुड़बुड़, तालापार अन्य प्रभावित ग्रामों में आवश्यकतानुसार टैंकर से जलापूर्ति किया जा रहा है. नगर पंचायत पाली की जल आवर्धन योजना कब धरातल पर मूर्त रूप लेगा यह डेट पर डेट देने वाला पीएचई विभाग भी नहीं बता पा रहा है. नागरिकों को अब केवल बारिश का सहारा है किंतु वह भी आधा आषाढ़ बीत जाने के बाद दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है. हालांकि मौसम विभाग के अनुसार 22 जून के बाद प्री मानसून और मानसून के सक्रिय होने की खबर से लोग उम्मीद भरी नजर से आसमान की ओर टकटकी लगाकर बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

आषाढ़ आधा निकला पर बारिश का पता नहीं

आषाढ़ लगते ही कृषक कृषि कार्य में जुट जाते हैं. खेत के मेढ़ पार व पानी निकलने की मुहाने के सुधार कार्य में लग जाते हैं. आषाढ़ की फुहार पड़ते ही खेतों की जोताई कर धान बोआई थरहा देने का कार्य शुरू हो जाता है. परंतु इस बार आषाढ़ आधा निकला जा रहा है बारिश का पता नहीं है. बारिश को लेकर क्षेत्र के किसानों में चिंता बढ़ रही है. पिछले बार आषाढ़ लगते ही कृषक कृषि कार्य भी में जुट गए थे. परंतु इस बार आषाढ़ लगे आधा माह निकला जा रहा है, पर मानसून का अता पता नहीं है. बारिश को लेकर क्षेत्र के किसानों मे चिंता बढ़ गई है. मानसून बारिश के इंतजार में क्षेत्र के कृषक खेतों की जोताई नहीं कर पा रहे है. क्षेत्र के कृषकों का कहना है 20 जून के बाद बारिश नहीं हुआ तो कृषि कार्य पिछड जायेगी. मानसून मे देरी होने से धान का उत्पादन मे कमी हो सकती है.

 

Navin Dilliwar

Editor, thesamachaar.in

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