
आज देशभर में मकर संक्रांति का त्योहार बनाया जा रहा है इस दिन लोग दही-चूड़ा और खिचड़ी का सेवन करते है। इस दिन गंगा स्नान और दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन किया गया गंगा स्नान महास्नान माना जाता है। कई धार्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
मकर संक्राति का त्योहार देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस दिन कहीं तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी खाने की परंपरा रही है. पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में दही-चूड़ा खाने की परंपरा है. इस शुभ दिन पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा सदियों पुरानी है. ऐसे में जानिए यहां क्यों खाया जाता है दही-चूड़ा.
मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं दही-चूड़ा और खिचड़ी?
मकर संक्रांति के दिन तिलकुट और खिचड़ी के साथ दही चूड़ा मुख्य व्यंजन माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन इन चीजों का सेवन करना बहुत शुभ होता है। इससे सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। इस समय धान के चावल की कटाई होती है और नए चावल बनते हैं। मान्यता है कि धान के ताजे चावल की कटाई के बाद चावल को पकाने के बाद सबसे पहले सूर्य देव को खिचड़ी के रूप में अर्पित किया जाता है। इससे सूर्य देव कृपा करते हैं।
इसके अलावा यूपी और बिहार में सूर्य देव को दही चूड़ा भी चढ़ाया जाता है। माना जाता है कि इससे रिश्ते मजबूत होते हैं। दोस्तों और रिश्तेदारों को दही-चूड़ा और खिचड़ी दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा और खिचड़ी खाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दही, चूड़ा और खिचड़ी का दान भी शुभ माना जाता है ।
दही-चूड़ा के फायदे
दही-चूड़ा पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है. कहते हैं कि चूड़ा में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है जो पाचन के लिए बहुत अच्छी होती है.
1. पचाने में आसान- चूड़ा या चिवड़ा पचाने में आसान होता है. नाश्ते में जब दही का सेवन किया जाता है, तो यह न केवल आपको ज्यादा समय तक भूख का अहसास नहीं होने देता और इसके साथ ही आपकी पाचन क्रिया को आसान बनाता है. इसमें मौजूद तत्व आपको इंस्टेंट एनर्जी भी देता है.
2. पेट खराब होने पर फायदेमंद- ये डिश पेट की खराबी से उबरने में मदद करती है. यूपी-बिहार में आज भी लूज मोशन को कंट्रोल करने के लिए लोग पहले इस कॉम्बो को खाने के लिए देते हैं. हल्की और बड़े आराम से पच जाने वाली ये डिश पाचन तंत्र को शांत करती है और आंत को भी ठंडा करती है.