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9 साल के बच्चे के हाथ में फैक्चर का गलत इलाज, सीएमएचओ डॉ. दानी ने आस्था हॉस्पिटल के खिलाफ बैठाई जांच

बीएएमएस डॉक्टर पवन तिवारी ने बच्चे का एक्स-रे व्हाट्सएप के जरिए दूसरे डॉक्टर को भेजा और उनकी सलाह पर खुद ही प्लास्टर चढ़ा दिया। एक महीने तक बच्चा दर्द और सूजन से तड़पता रहा, और जब गुरुवार को प्लास्टर खोला गया, तो हाथ की हड्डी तिरछी जुड़ी पाई गई।

उतई : दुर्ग जिले के उतई क्षेत्र में आस्था अस्पताल के एक डॉक्टर पर नौ वर्षीय बच्चे के फ्रैक्चर के इलाज में लापरवाही का आरोप लगा है। बच्चे के हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद डॉक्टर ने एक्स-रे की रिपोर्ट फोन पर दूसरे डॉक्टर को भेजकर राय ली और उसी के आधार पर प्लास्टर कर दिया। प्लास्टर खोलने पर भी फ्रैक्चर जस का तस पाया गया, जिससे बच्चा दर्द और सूजन से बेहाल है। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच और बच्चे को योग्य ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से इलाज दिलाने की मांग की है।

child plaster wrong treatment
फोन पर एक्स-रे देख कर दिया 9 साल के बच्चे का प्लास्टर

दुर्ग जिले के उतई में स्थित आस्था हॉस्पिटल में एक 9 साल के बच्चे के हाथ में फैक्चर का गलत इलाज को लेकर सीएमएचओ दुर्ग ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। एसडीएम के नेतृत्व में टीम मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं

स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मनोज दानी ने बताया कि उतई निवासी राजेश कुमार बंजारे ने कलेक्टर से. शिकायत की थी

कि आस्था हॉस्पिटल में गलत हड्डी का इलाज करने से बच्चे का हाथ खराब हो गया है।

शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। अपर कलेक्टर दुर्ग ने एसडीएम दुर्ग हरवंश मिरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति में डॉ. जेपी मिश्रा (पैथोलॉजिस्ट) और डॉ. राजकुमार नायक (अस्थि रोग विशेषज्ञ) शामिल हैं। जांच समिति पूरे प्रकरण की जांच कर 7 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पेश करेगी।

फ्रैक्चर की वजह से कराया एक्स-रे

 

26 दिसंबर 2025 को ग्राम पतोरा निवासी सलोक बंजारे (9 साल) के दाएं हाथ में दुर्घटना के कारण फ्रैक्चर आ गया था। उसे इलाज के लिए आस्था अस्पताल उतई ले गए। वहां डॉ. पवन तिवारी (बीएएमएस/एमडी, डीफार्मा) ने बच्चे का एक्स-रे कराया। इसके बाद उसने डॉ. सौरम चंद्राकर को एक्सरे फिल्म भेजकर उनसे सलाह ली। डॉ. चंद्राकर के कहने पर डॉ. पवन तिवारी ने बच्चे के हाथ में प्लास्टर कर दिया। प्लास्टर लगने के कई दिनों बाद भी बच्चे के हाथ में दर्द, सूजन और कमजोरी बनी हुई थी। परिजन जब बच्चे को लेकर आस्था अस्पताल पहुंचे और प्लास्टर खोला गया, तो बच्चे के हाथ में कोई सुधार नजर नहीं आया। हाथ की हड्डी तिरछी दिखाई दे रही थी। इसके बाद परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच की मांग की है.

 

Navin Dilliwar

Editor, thesamachaar.in

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