
दुर्ग – सेठ आर. सी. एस. कला एंव वाणिज्य महाविद्यालय में 17 एवं 18 फरवरी को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली का कार्यान्वयन विषय पर आधारित था। सम्मेलन का उद्घाटन रूंगटा इंटरनेशनल स्कील यूनिवर्सिटी भिलाई के कुलाधिपति संतोष रूंगटा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला शिक्षण समिति के अध्यक्ष प्रवीण चंद्र तिवारी ने किया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूजा मल्होत्रा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। संतोष रूंगटा ने शुभारंभ अवसर पर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से तात्पर्य उस बहुआयामी बहु-विषयक ज्ञान है इसमें वेद, उपनिषद, साहित्य, प्राचीन गणित, दर्शन, भाषा, व्याकरण आदि शामिल है। उन्होंने कहा भविष्य में बहुत अवसर है लेकिन प्राप्त करना आसान नहीं है लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और ईमानदार प्रयासों से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। प्रवीण चंद्र तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा बहुत ही समृद्ध है जिसे हम भुला चुके हैं और इसलिए आवश्यक हो गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसे शामिल किया जाये ताकि आज के युवा अपने भारतीय ज्ञान परंपरा को जान सके और उस पर गर्व कर सके। उन्होंने आगे कहा कि शून्य और दशमलव का ज्ञान भारत नहीं देता तो आज हम चांद पर नहीं जा पाते। सम्मेलन के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता जयप्रकाश पाण्डेय ज्वांइट डायरेक्टर जनरल डीजीसीए नागरिक उड्यन मंत्रालय भारत सरकार जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 निर्माण समिति के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान किया और इस शिक्षा नीति में इसे शामिल करने के औचित्य पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे वेद, उपनिषद, खगोल विज्ञान, साहित्य, प्राचीन गणित, दर्शन, भाषा, व्याकरण में वे सभी जानकारियां है जिसे अन्य देश एवं वैज्ञानिक उपयोग में ला रहें है और इसे अपना ज्ञान और अपनी खोज बता रहें है जबकि वास्तविक में यह खोज हमारी है। भारतीय ज्ञान परंपरा के द्वारा पूर्व के मनीषियों ने कई खगोलीय गणना की जिसे वैज्ञानिक पद्धति से प्रमाणित भी किया गया जो बिल्कुल सही और सटीक है। द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. मेधा कानेटकर प्राचार्य श्री निकतन महाविद्यालय नागपुर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली के कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला। द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा का उद्देश्य रोजगार पाना नहीं है बल्कि व्यक्ति का समग्र विकास हो, जिससे कि वे समाज का विकास कर सके, यही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य है। आगे उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का बहुत बड़ा योगदान है। योग हमारी प्राचीन परंपरा है और आज पूरा विश्व इसे मानता है और इससे लाभान्वित हो रहा है। द्वितीय दिवस के मुख्य वक्ता डॉ. जी. ए. घनश्याम प्राचार्य शासकीय नवीन महाविद्यालय कबीरधाम ने अपने वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा नीति में शामिल करने के औचित्य पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा नीति के तीन महत्वपूर्ण आयाम शिक्षा, चरित्र और कौशल है। उन्होंने देश के कई प्राचीन मंदिरों के निर्माण में वैदिक रीति एवं खगोलीय गणनाओं के उपयोग किये जाने का उल्लेख किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप ने शिक्षा नीति के तीन महत्वपूर्ण आयाम शिक्षा, चरित्र और कौशल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दुर्गा शुक्ला ने दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन के संयोजक वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष मनोज कुशवाहा थे। इस अवसर पर महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष मनोज शर्मा, जिला शिक्षण समिति के संरक्षक डॉ. जयराम अय्यर, सदस्य शंकरलाल अग्रवाल, विनोद जैन, विरेन्द्र शुक्ला एवं आयोजन समिति के सलाहकार डॉ. सोमाली गुप्ता, विश्वविद्यालय शोध प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. सुनीता मिश्रा, अन्य महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे। कार्यकम का संचालन पवनदीप कौर, यूमेनिका वर्मा एवं पूर्वी वर्मा ने किया।




