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छत्तीसगढ़ मे कुष्ठ मरीजों की संख्या राष्ट्रीय सूचकांक से ऊपर, रेड जोन मे आधा दर्जन

रायपुर – विश्वभर में आज कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाएगा। कटोरा कहा जाने वाले छत्तीसगढ़ अब कुष्ठ रोग का गढ़ बनता जा रहा है। 2024 तक जहां प्रदेश के सिर्फ 17 जिले ही कुष्ठ रोग ग्रसित जिलों में गिने जाते थे, वहीं अब इन जिलों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। पूरे दिन देश में सिर्फ 121 जिलों को ही कुष्ठ रोग ग्रसित जिले के रूप में चिन्हान्कित किया गया है। इनमें से भी 21 केवल छग के ही हैं।

छग प्रदेश के आधा दर्जन जिले ऐसे हैं, जिन्हें रेड जोन में रखा गया है, अर्थात यहां कुष्ठ रोगियों की संख्या राष्ट्रीय सूचांक से कई गुना ज्यादा है। इन जिलों में कोरबा, जांजगीर चांपा, रायगढ़, सारंगढ़, महासमुंद, बलौदाबाजार शामिल है।

10 हजार पर एक से अधिक मरीज चिंतनीय-

यदि प्रति 10 हजार व्यक्तियों पर एक व्यक्ति कुष्ठ रोग से पीड़ित पाया जाता है, तो इसे सामान्य माना जाता है, लेकिन प्रति दस हजार व्यक्तियों के पीछे कुष्ठ रोगियों की संख्या 2 या उससे अधिक होती है तो इसे गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। डाक्टरों ने बताया, लोगों में कुष्ठ रोग के प्रति जागरुकता का अभाव है। वे इस बीमारी को छिपाते हैं, इसलिए शुरुआती समय में इसका इलाज नहीं हो पाता है। विकृति का रूप लेने के बाद ही लोग इसका इलाज प्रारंभ करवाते हैं, जब तक बहुत देर हो चुकी होती है। सामाजिक व्यवस्थता एक साधारण बीमारी का संज्ञान ना लेकर जन सामान्य को विकृति से ग्रसित होने दे रही है।

रेड जोन के जिलों की बात करे तो चांपा जांजगीर जिले के दो ब्लाक बलौदा और बम्हीडीह सामान्य हैं। यहां राष्ट्रीय सूचकांक से पीड़ितों की संख्या एक से कम है, लेकिन तीन ब्लाक पामगढ़, नवागढ़ और अकलतरा में मरीजों की संख्या ज्यादा है। डॉक्टर थवाइत का कहना है कि पहले से अभी हालात बेहतर हुए हैं। मरीज ढूंढे जा रहे हैं। इसी तरह कोरबा जिला भी रेड जोन में है। यहां दिसंबर में नाए मरीजों को ढूंढने अभियान चलाया गया, तब स्थिति गंभीर होने का पता चला। एक ही माह में यहां 100 केस सामने आए। देखा जाए तो इस जिले में 338 नए मामले सामने आए हैं। डॉक्टर अरविंद का कहना है, मरीज अपनी बीमारी को छिपाते हैं, इसलिए दिक्कत हो रही है। मर्ज बढ़ने या विकृति आने पर ही मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, तब तक मामला कठिन हो जाता है।

महासमुंद जिले मे 20 बच्चे प्रभावित-

महासमुंद जिले के सरायपाली में कुष्ठरोगियों की संख्या बढ़ी है। जिले में हाल ही चली जांच में 20 बच्चों की शिनाख्त हुई, जिनको कुष्ठ था। डॉक्टरों का कहना है, अभियान के तहत मरीजों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। कल से स्पर्श अभियान के जरिए नए मरीजों की तलाश की जाएगी।

शासकीय तंत्र भी इस बीमारी को अधिक गंभीरता से बहीं ले रहा है। जहां रोगी अपनी बीमारी छिपा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर छेत्रीय कुष्ठ प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में विगत 3 महीने से मरीजों का दाखिला एवं ऑपरेशन बंद कर दिया गया है। जो मरीज यहां पहले से इलाज करा रहे थे, उन्हें अब दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि विकृति वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इनकी जांच का पुख्ता सिस्टम नहीं होने की वजह से इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है।

Navin Dilliwar

Editor, thesamachaar.in

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