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ब्रेकिंग : शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर भ्रस्टाचार का लगा आरोप,कांग्रेस नें टेंडर से पहले काम सौंपने का लगाया आरोप ! पढ़े ख़बर

– छत्तीसगढ़ की साय सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं।

– कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक निजी कंपनी को काम सौंप दिया गया, जो सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।

– कांग्रेस का आरोप है कि जेम पोर्टल पर टेंडर 3 जनवरी को खुलना था, लेकिन उससे पहले ही साइट पर काम शुरू हो चुका था।

– पार्टी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

 

दुर्ग – छत्तीसगढ़ की साय सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक निजी कंपनी को काम सौंप दिया गया, जो सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। यह मामला जेम पोर्टल की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है, जहां टेंडर 3 जनवरी को खुलना था, लेकिन उससे पहले ही साइट पर काम शुरू हो चुका था। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

क्या है पूरा मामला?

बालोद जिले के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में 9 से 13 जनवरी 2026 तक नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी का आयोजन प्रस्तावित है। इस इवेंट की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग पर है, और इसके लिए टेंट, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं के लिए जेम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल पर टेंडर जारी किया गया था। टेंडर 3 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे या दोपहर 12 बजे खुलना तय था, लेकिन कांग्रेस के अनुसार, इससे पहले ही एक निजी कंपनी ‘भारत किराया भंडार’ ने साइट पर ट्रक, सामग्री और मजदूरों के साथ काम शुरू कर दिया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुबोध हरितवाल ने रायपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए कहा, “जंबूरी आयोजन के लिए जेम पोर्टल पर निविदा 3 जनवरी को सुबह 12 बजे खुलनी थी, लेकिन इसके पहले ही आयोजन स्थल पर एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया था। टेंडर खुलने से पहले ही परिसर में भारत किराया भंडार नामक कंपनी के ट्रक, सामग्री और मजदूरों की मौजूदगी देखी गई।” उन्होंने आगे सवाल उठाया कि क्या टेंडर से पहले ही यह तय कर लिया गया था कि काम किस कंपनी को दिया जाएगा? क्या मंत्री गजेंद्र यादव और विभागीय अधिकारियों ने कंपनी को पहले से ही काम मिलने का भरोसा दे दिया था?

कांग्रेस का आरोप है कि यह ‘मलाई मिठाई टेंडर स्कीम’ का हिस्सा है, जहां बिना टेंडर के ही काम बांटे जा रहे हैं। सुबोध हरितवाल ने कहा, “टेंडर से जुड़ी जानकारी पहले ही संबंधित कंपनी तक पहुंचा दी गई। जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन और पारदर्शी मानी जाने वाली प्रणाली के बावजूद यदि किसी कंपनी को पहले से काम शुरू करने की छूट मिल रही है, तो यह पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में डालता है।” उन्होंने यह भी बताया कि टेंडर दस्तावेजों में दिए गए संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ पाए गए, जो जवाबदेही से बचने का संकेत है।

 

आरोपों की गहराई और सवाल

कांग्रेस ने मंत्री गजेंद्र यादव की भूमिका पर सीधे सवाल उठाए हैं। हरितवाल ने पूछा, “क्या टेंडर खुलने से पहले ही मंत्री गजेंद्र यादव और अधिकारियों की जानकारी के बिना काम शुरू हो सकता है? क्या विभागीय मंत्री और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नहीं है?” उनका कहना है कि अगर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो कंपनी किसके आदेश पर काम कर रही थी? अन्य निविदाकर्ताओं का क्या कसूर था, जो नियमों का पालन कर टेंडर का इंतजार कर रहे थे? उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

यह काम करोड़ों रुपए का बताया जा रहा है, और कांग्रेस का दावा है कि इसमें बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मंत्री स्तर पर जानकारी होने के बावजूद आंखें मूंद ली गईं या सांठगांठ को मौन सहमति दी गई। यह मामला प्रदेश की टेंडर प्रक्रिया की सच्चाई उजागर करता है, जहां पारदर्शिता का दावा किया जाता है लेकिन व्यवहार में उल्लंघन हो रहा है।

सरकार की चुप्पी और जांच की मांग

अभी तक साय सरकार या शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि मंत्री और अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हो सके। हरितवाल ने चेतावनी दी कि अगर जांच नहीं हुई तो जंबूरी से जुड़ी सभी गतिविधियां संदेह के घेरे में रहेंगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेंद्र वर्मा और अमित तिवारी भी मौजूद थे।

यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है। मामले की जांच से ही सच्चाई सामने आएगी कि क्या यह महज संयोग था या सुनियोजित सांठगांठ।

Navin Dilliwar

Editor, thesamachaar.in

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