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क्या गजेंद्र यादव होंगे छत्तीसगढ़ के 12वें मंत्री? बनाए जा सकते है शिक्षा मंत्री: सामाजिक और राजनीतिक समीकारण के हिसाब से इससे बीजेपी को हो सकता फ़ायदा! पढ़े सम्पूर्ण खबर

छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में फिलहाल एक सीट रिक्त है। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अगर बृजमोहन जीतते है तो मंत्रिमंडल में एक सीट और खाली हो जाएगी। याने मंत्रिमंडल के अगले फेरबदल में दो नए मंत्री शामिल किए जाएंगे।

रायपुर-2023 में छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में  बीजेपी की अप्रत्याशीत जीत के साथ ही, मुख्यमंत्री के रूप में विष्णुदेव साय के साथ 10 दिसंबर को दो उप मुख्यमंत्रियों ने शपथ लिया था। अरुण साव और विजय शर्मा। इसके बाद 21 दिसंबर को नौ और मंत्रियों ने शपथ लिया। छत्तीसगढ़ में मंत्रियों के 12 पद बनते हैं। याने अभी एक सीट खाली है। इसके अलावे रायपुर से विधायक बृजमोहन अग्रवाल लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।ऐसे में 4 जून के बाद बृजमोहन की शिक्षा विभाग भी खाली हो जाएगी । तो कुल मिलाकर बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार में 2 नए मंत्रियो की एंट्री होंगी. 

 

गजेंद्र की दावेदारी इसलिए प्रबल-

विष्णुदेव साय कैबिनेट के 12वें मंत्री के लिए दुर्ग से विधायक गजेंद्र यादव की दावदारी तगड़ी बताई जा रही है। गजेंद्र ने विधानसभा चुनाव 2023 में दुर्ग में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा को 48 हजार से अधिक मतों से हराया था। वे छत्तीसगढ़ आरएसएस के बड़े चेहरा बिसराराम यादव के बेटे हैं। बिसराराम छत्तीसगढ़ आरएसएस के प्रांच प्रमुख रह चुके हैं। गजेंद्र को मंत्री बनाए जाने के पीछे तीन वजहें बताई जा रही है। पहली, छत्तीसगढ़ में इस बार पांच विधायक यादव समाज से चुनकर आए हैं। इसलिए बीजेपी को यादव वोटरों में अच्छा स्कोप दिख रहा है। दूसरा, बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव है। बिहार में यादव वोटर निर्णायक स्थिति में होते हैं। मध्यप्रदेश में यादव को मुख्यमंत्री बनाने के बाद छत्तीसगढ़ से यादव को मंत्री बनाकर बीजेपी इसे बिहार में भुनाएगी। और तीसरा संघ पृष्ठभूमि के गजेंद्र को मंत्री बनाकर संघ के साथ समीकरण को बैलेंस करने का प्रयास करेगी बीजेपी। इस समय संघ के नेता बीजेपी से कुछ खींचे-खींचे से लग रहे हैं। संघ के लोग भी मानते हैं कि सब ठीक नहीं है। जबकि, जब अमित शाह छत्तीसगढ़ को लेकर उम्मीद छोड़ चुके थे, तब संघ के शीर्ष नेताओं ने उन्हें अश्वस्त किया कि हमलोग बाजी पलट देंगे…आप छत्तीसगढ़ पर फोकस बढ़ाइये। और 15 सीटों पर सिमट गई पार्टी पांच साल बाद 54 सीटें जीत गई। बीजेपी के एक सीनियर नेता ने बताया कि मंत्री पद के लिए गजेंद्र की दावेदारी की चर्चा पार्टी में भी है। मगर अभी कोई खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं है।

बनाए जा सकते है शिक्षा मंत्री –

गजेंद्र ने विधानसभा चुनाव 2023 में दुर्ग में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा को 48 हजार से अधिक मतों से हराया था। वे छत्तीसगढ़ आरएसएस के बड़े चेहरा बिसराराम यादव के बेटे हैं।गजेंद्र पढ़े लिखें भी है,केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी के बड़े नेताओं से बिसराराम यादव के संबंध है. इसके साथ पिछले दिनों मंत्री OP चौधरी ने भी गजेंद्र के मंत्री बनाए जाने को लेकर हिंट दिया था. एक और समीकरण गजेंद्र के पक्ष में जाता है की इस बार बीजेपी लगभग 70 फ़िसदी नए चेहरे को मंत्री मण्डल में जगह दी है और इसके साथ ही दुर्ग विधानसभा VVIP जगह है, यहाँ से कई बड़े नेता हुए है जिन्होंने राज्य और केंद्र दोनों जगह पर प्रभाव डाला है !ऐसे में दुर्ग जिले को मंत्रिमंडल में बीजेपी को जगह देना ही होगा,और अगर ऐसा हुआ तो गजेंद्र के अच्छी दिन आ सकते है .

 

गजेंद्र यादव को और करीब से जानिये – 

गजेंद्र यादव ने कांग्रेस का किला फतह करते हुए दुर्ग शहर विधानसभा से जीत हासिल की है। उन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री व कांग्रेस के बड़े नेता मोतीलाल वोरा के पुत्र अरुण वोरा को चुनाव हराया है। अरुण वोरा सीटिंग विधायक थे। उन्हें 48697 मतों के भारी अंतर से चुनाव हारना पड़ा।

गजेंद्र यादव के पिता बिसराराम यादव आरएसएस के प्रान्त कार्यवाह थे। गजेंद्र यादव दुर्ग नगर निगम में एक बार पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में वे भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष की जवाबदारी निभा रहे हैं।

भाजपा के गजेंद्र यादव को 97906 (63.89%) वोट मिले। जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी अरुण वोरा को 49209 (32.11%) वोट मिले। अन्य प्रत्याशियों को मिलाकर 5188 (3.39%) वोट मिले।

भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र यादव पहली बार चुनाव लड़े हैं साफ सुथरी एवं मिलनसार छबि के लाभ उन्हें मिला। चुनाव के समय धुआंधार प्रचार का लाभ भी उन्हें मिला। जनसंपर्क में वे अपने प्रतिद्वंदी अरुण वोरा से काफी आगे रहे। कांग्रेस में बिखराव दिखा। गजेंद्र की चुनावी राजनीति अनुभवी हाथ में होने का फायदा मिला। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख रहे बिसरा राम यादव के मार्गदर्शन में चुनाव संचालन हुआ। इसका उन्हें लाभ मिला. चुनाव से पहले संगठन में मिले दायित्व को शिद्दत से निभाते हुए गजेंद्र ने कार्यकर्ताओं में पैठ बना ली थी।

वहीं दूसरी और कांग्रेस के आम कार्यकर्ता खुद ही परिवारवाद से मुक्ति चाह रहे थे। कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में पूरे मन से काम नहीं किया। जनता में भी बदलाव का मूड था। भाजपा ने चुनाव में परिवारवाद को मुद्दा बनाकर अरुण वोरा को घेरा। उन पर लगे निष्क्रिय और नगर निगम तक सीमित होने के आरोपों को भी भाजपा ने जमकर उठाया। यहां मारवाड़ी और लोकल दो गुटों में वोट बट गए थे। जिसका फायदा भाजपा को मिला।

 

एक और सीट पर अनुभवी नेता को मिल सकता है मौका –

बृजमोहन अग्रवाल अगर चुनाव जीतते है तो एक और मंत्री की सीट के लिए कई दावेदार हैं। पहली बार चुने गए बीजेपी के कई विधायकों की कोशिश है कि उन्हें मौका मिल जाए। राजस्थान में पहली बार के विधायक भजनलाल के मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद नए विधायकों की उम्मीदें और बढ़ गई है। मगर तगड़ी दावेदारी तीन पूर्व मंत्रियों की बताई जा रही है। ये तीन हैं…अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर और राजेश मूणत। ये तीनों रमन सिंह सरकार में मंत्री रहते हुए कई बड़े विभाग संभाल चुके हैं। दिसंबर 2024 में विष्णुदेव साय सरकार के गठन के समय इन तीनों को मंत्री बनाए जाने की अटकलें थी, मगर ऐसा हो नहीं पाया। अब सियासी प्रेक्षक भी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि बृजमोहन अग्रवाल की जगह इन तीनों में से किसी एक को मौका मिलेगा या फिर किसी नए चेहरे पर बीजेपी दांव लगाएगी?

The Samachaar

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